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- बालराई
राजस्थान प्रांत के पाली जिले के गोड़वाड़ क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 14 पर स्थित गांव 'बालराई' सुकड़ी नदी के किनारे बसा है। सबसे पहले सुराणा और सोनीगरा नामक दो परिवार जोधपुर रियासत में चाणोद ठिकाने से जुड़े बालराई नगर में आए और अपनी चतुराई से यहां के ठाकुर (राजा) से अच्छे संबंध बनाकर कारोबर करने लगे। धीरे-धीरे जैन परिवारों की संख्या भी बढ़ने लगी। शुरुआत का एक छोटा-सा पौधा वटवृक्ष बन गया। कुछ परिवार व्यवसाय के लिए बेंगलूरु, मद्रास और मुंबई जाकर सेट हो गए। मरुधर में स्थायी निवासियों ने पूजा-अर्चना हेतु, स्व. ओटरमलजी भगाजी के निजी मकान में श्री सिध्दचक्रजी का गट्टा स्थापित करके अपनी धर्म उपासना करने लगे। गांव की पुण्याई ने प्रभाव दिखाया और उन दिनों स्व. श्री शेषमलजी पूनमचंदजी सुराणा के मकान की नींव खोदते समय एक श्यामवर्णी पाषाण की श्री पार्श्वनाथ प्रभु की छोटी सी प्रतिमा भूगर्भ से निकली, जिसे सिध्दचक्रजी के पास स्थापित करके पूजा-वंदना प्रारंभ हुई। तत्पश्चात् वर्तमान धर्मशाला की जगह वाली जमीन, जहां पर उस समय में धर्मशाला एवं घर मंदिर दोनों ही बनाए गए थे, श्री पूनमचंदजी सुराणा की तरफ से श्री संघ को भेंट में प्राप्त हुई। श्री संघ को भेंट में प्राप्त हुई। श्री संघ के अग्रणी लोगों द्वारा जयपुर से मूर्तियां लाकर एवं खिमेल (सिंहवल्ली) गांव के प्रतिष्ठोत्सव प्रसंग पर पू. आ. श्री विजयानंदसूरीजी के शिष्य आ. श्री. कमलसूरिजी के पट्टधर जैनाचार्य आ. श्री लब्धिसूरीश्वरजी के कर कमलों से वीर नि.सं. 2469, शाके 1864, वि. सं. 1999, माघ शु. 11 सोमवार दि. फरवरी 1943 को अंजनशलाका प्रतिष्ठा संपन्न करवाकर उन्हें विधिवत बालराई लाया गया और मु. श्री चंद्रप्रभुस्वामी, श्री संभवनाथजी एवं श्री विमलनाथजी को शुभ मुहूर्त की मंगल बेला में घर मंदिर में प्रतिष्ठित किया गया। इस कालावधि में गांव में सभी लोगों में शांति एवं धन-धान्य की वृध्दि रही एवं शांतिपूर्वक समय बीतता रहा। 'जैन तीर्थ सर्वसंग्रह' ग्रंथ के अनुसार, श्री संघ द्वारा बाजार में धाखाबंध सह पाषाण की एक प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जा रही थी। उन दिनों यहां 68 जैन और एक उपाश्रय था। इस तथ्य से उपरोक्त बातें मिलती हैं। करीब 28 साल बाद सं. 2027 में वर्तमान मंदिर की पुण्यभूमि श्री देवीचंदजी केसरीमलजी सुराणा परिवार की तरफ से श्री संघ को भेंट स्वरुप प्राप्त हुई। यहां पर मंदिर निर्माण का निर्णय कर सं. 2027 या 2028 में गोड़वाड़ के जोजावर रत्न आ. श्री जिनेंद्रसूरिजी की निश्रा में खात मुहूर्त संपन्न हुआ। मगर प्रतिष्ठा आपश्री के हाथों संपन्न न हो सकी, क्योंकि आप वि. सं. 2029, जेठ वदि 5, मंगलवार, दि. 22 मई 1973 को शिवगंज में स्वर्गवासी हो गए। समय के साथ जिनालय का कार्य पूर्ण गति से चलता रहा। देवविमान स्वरुप देदीप्यमान, श्वेत पाषाण से निर्मित, भव्य शिखरबध्द कलात्मक जिनप्रासाद में सभी प्राचीन जिनबिंबो को मूलगंभारे में, नूतन कोरणीयुक्त परिकर में श्वेतवर्णी 21 इंच पद्मासनस्थ मूलनायक श्री चंद्रप्रभुस्वामी आदि प्रतिमाओं के साथ ही 4 नूतन जिनबिंबों एवं अधिष्ठायक देवी-देवताओं की अंजनशलाका प्रतिष्ठा वीर नि. स. 2501, शाके 1896, वि.स. 2023 येष्ठ शुक्ल 10, बुधवार, दि. 18 जून 1975 को विजय मुहूर्त में 12.39 बजे आ. श्री जिनेन्द्रसूरिजी के पट्टधर और शिष्य श्री पद्मविजयजी (वर्तमान में आचार्य) आ. ठा. की पावन निश्रा में महामहोत्सव पूर्वक संपन्न हुई। उस जमाने में हेलिकॉप्टर द्वारा पुष्पवर्षा पाली जिले के ग्रामीण इलाके में प्रथम बार थी। 20 वर्ष बाद रावला के पास सुराणा परिवारों की कुलदेवी श्री सुसवाणी माता के शिखरबध्द श्वेत पाषाण से निर्मित मंदिर की प्रतिष्ठा आ. श्रीपद्मसूरिजी आ.ठा. की निश्रा में वीर नि.सं. 2521, वि.सं. 2051, शाके 1916, वैशाख सुदि 15, पूर्णिमा, रविवार, दि. 14 मई, 1995 को महोत्सवपूर्वक संपन्न हुई। पुन: 16 वर्षो के पश्चात् जिनालय में नूतन निर्मित देवलियों में अधिष्ठायक देव श्री नाकोड़ा भैरवदेव एवं अधिष्ठायिका शासनरक्षिका मां पद्मावती आ. ठा. 7 की पावन निश्रा में वीर नि. सं. 2537, शाके 1932, वि. सं. 2067, आषाढ़ सुदि 2, शनिवार, दि. 02 जुलाई, 2011 को हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई। प्रतर्िवष्ज्ञ जेठ सुदि 10 को श्री घेवरचंदजी चुन्नीलालजी सुराणा परिवार ध्वजा चढ़ाते हैं। यहां की महलनुमा हवेलियां आकर्षक को केंद्र हैं। वर्तमान में बालराई नगर एक सुखी-संपन्न गांव है। गांव में हाईस्कूल, बालिका विद्यालय एवं 3 बालविद्यालय, आयुर्वेदिक हॉस्पीटल, पुलिस चौकी एन्दलागुड़ा, ग्रामी बांध से सिंचाई, दूरसंचार, डाकघर आदि सभी सुविधाएं हैं। नृसिंह धारा, हनुमानजी, माताजी के अन्य मंदिर यहां पर है। 5000 की कुल जनसंख्या में जैनों की आबादी 300 के करीब है। 60 घर हौती (घर ओली) है। यहां से 2 श्राविकाओं ने दीक्षा ग्रहण कर कुल और गांव का नाम रोशन किया है। गांव का श्री डोवेश्वर प्रवेश द्वार विशाल एवं आकर्षक बना है। श्री जैन युवक संघ और श्री चंद्रप्रभु महिला मंडल यहां की सहयोगी संस्थाएं हैं। श्री डोवेश्वर महादेव: नेशनल हाईवे पर बालराई कॉर्नर पर प्राचीन डोवेश्वर महादेवजी का मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र है। यहां श्री डावारामजी देवासी ने जीवित समाधि ली थी। प्रतिवर्ष चैत्र मास में यहा मंला लगता है। बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शनार्थ आते हैं। मार्गदर्शन: नेशनल हाईवे क्र. 14 पर स्थित बालराई रानी स्टेशन से 20 कि.मी., पाली से 35 कि.मी. सांडेराव से 20 कि.मी., फालना स्टेशन से 32 कि.मी. और जोधपुर हवाई अड्डे से 115 कि.मी. दूर स्थित है। यहां आवागमन के लिए सरकारी और प्रायवेट बसों के साथ-साथ टैक्सी, ऑटो आदि की भी अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हैं। सुविधाएं: श्री सुसवाणी भवन, श्री जैन भवन, श्री जैन धर्मशाला, जैन आराधना भवन में ठहरने की अच्छी सुविधा है। आधुनिक व त्रिमंजिली, सेंट्रल वातानुकूलित 6 कमरों के साथ नई धर्मशाला निर्माण पूर्णता के निकट है। जैन भोजनशाला की उत्तम व्यवस्था है।
- चुन्नीलालजी चंदन (बाशा) 'शताब्दी रत्न' से सम्मानित
शताब्दी गौरव गच्छाधिपति आचार्य श्री राजशेखर सुरीश्वरजी महाराज, आचार्य श्री रत्नाकर सुरीश्वरजी महाराज, राष्ट्रसंत आचार्य श्री चन्द्राननसागर सुरीश्वरजी महाराज एव आचार्य श्री रत्नसंचय सुरीश्वरजी महाराज की पावन निश्रा में उनके निवास स्थान इनफिनिटी टॉवर वालकेश्वर में आयोजित एक भव्य समारोह में वरिष्ठ समाजसेवी धर्मप्रेमी चुन्नीलालजी चंदन (बाशा) को शताब्दी रत्न अलंकरण से समान्नित करते हुए नाहर ग्रुप के चेयरमेन सुखराज नाहर, विजय लक्ष्मी ग्रुप के चेयरमेन शांतिलाल कवाड, पूनम डेवलोपेर्स के चेयरमेन माणेक मेहता एवं शताब्दी फाउंडेशन के सिद्धराज लोढा। इस अवसर पर प्लेजेंट पैलेस सन प्रमुख वीरेंद्रभाई शाह एव सांचोरी जैन संघ के सदस्यों सहित समाज के गणमान्य उपस्तिथ थे।
- राष्ट्रीय कवि युगराज जैन बने लॉयन्स क्लब, रानी के नये अध्यक्षलॉयन्स आई हॉस्पिटल ट्रस्ट द्वारा किया भव्य स्वागत
रानी। लॉयन्स क्लब, रानी क्लब 2025-26 के निर्विरोध नवनिर्वाचित अध्यक्ष लॉयन राष्ट्रीय कवि युगराज बी. जैन बीजोवा के लॉयन्स आई हॉस्पिटल ट्रस्ट, रानी में पधारने पर लॉयन्स क्लब अध्यक्ष लॉयन उत्तमचंद यू सोलंकी, ट्रस्ट अध्यक्ष नवरतन सी मेहता, प्रोजेक्ट चेयरमेन घीसूलाल चौधरी, क्लब सचिव हरीश सुराणा, लॉयन सदस्य अशोक जैन, विजय मालवीय एवं हॉस्पिटल के चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर बीएल नायक, डॉक्टर महेश पटेल, डॉक्टर रमेश जांगिड़, डॉक्टर अमिता जेठवा, डॉक्टर मीनाक्षी चौधरी और हॉस्पिटल कर्मचारी गणों द्वारा लॉयन युगराज बी. जैन और उनकी धर्मपत्नी कमला जैन को हार पहनाकर बधाई देते हुए उनके यशस्वी कार्यकाल की कामना की। लॉयन युगराज बी जैन ने क्लब और हॉस्पिटल की गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाकर लॉयन्स क्लब रानी को और ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लिया।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के WAVES 2025 विजऩ से प्रेरित होकरलाइका ग्रुप (यूके-यूरोप) और महावीर जैन फिल्म्स ने वैश्विक दर्शकों के लिए 9 भारतीय फीचर फिल्मों के निर्माण के लिए साझेदारी की घोषणा
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस मुंबई। यूके और यूरोप स्थित लाइका ग्रुप की निर्माण इकाई लाइका प्रोडक्शन्स, जिसने रजनीकांत के साथ 2.0 (2018) और मणिरत्नम के साथ पोन्नियिन सेलवन I & II जैसी बड़ी बजट की फिल्में बनाईं, तथा महावीर जैन फिल्म्स, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक मनोरंजन मंच पर भारतीय कहानी कहने की विरासत को ऊँचाई देने के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, आने वाले 3 वर्षों में 9 प्रभावशाली फिल्मों के निर्माण के लिए एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। लाइका गु्रप के चेयरमैन डॉ. अलिराजा सुबासकरण और महावीर जैन ने सूचना और प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस और राज्य मंत्री (सूचना एवं प्रसारण) डॉ. एल. मुरुगन से WAVES समिट में मुलाकात कर इस प्रतिबद्धता को साझा किया। सुबासकरण और महावीर जैन ने संयुक्त रूप से कहा कि भारत वास्तव में सौभाग्यशाली है कि हमारे पास एक दूरदर्शी, गतिशील और संवेदनशील प्रधानमंत्री हैं। यह सही समय है कि भारत की समृद्ध संस्कृति, दर्शन और ज्ञान को सिनेमा की भव्यता के साथ दुनिया तक पहुँचाया जाए और शक्तिशाली कंटेंट के माध्यम से और अधिक प्रेम, करुणा और एकता फैलाई जाए। उन्होंने कहा कि ये फिल्में हमारे माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी के प्रति हमारी कृतज्ञता व्यक्त करने का एक छोटा सा प्रयास हैं, जो आने वाली पीढिय़ों के लिए भारत और दुनिया को बेहतर बनाने के लिए अथक और अद्भुत कार्य कर रहे हैं। लाइका ग्रुप एक विविधीकृत बहुराष्ट्रीय समूह है, जो 23 देशों में दूरसंचार, स्वास्थ्य, यात्रा, मनोरंजन और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत है।
- जीतो टाउन रिप्रेजेंटेटिव (JTR) को मिला स्वतंत्र वर्टीकल का दर्जाछोटे शहरों से वैश्विक मंच तक जीतो की अनूठी पहल
जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) की मैनेजमेंट कमेटी ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जीतो टाउन रिप्रेजेंटेटिव (JTR ) को एक स्वतंत्र वर्टीकल के रूप में मान्यता प्रदान की है। यह निर्णय न केवल जीतो की समावेशी सोच को दर्शाता है, बल्कि टायर 2 और टायर 3 शहरों, कस्बों एवं गांवों में बसे जैन समाज को जीतो की मुख्य धारा से जोडऩे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल के संस्थापक जीतो एपेक्स वाइस प्रेसिडेंट कमलेश सोजतिया हैं, जिनके नेतृत्व में जेटीआर एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। उनके साथ शरद पानोत और अशोक मेहता ने भी सक्रिय और प्रेरणादायी भूमिका निभाई है, जिससे इस अभियान को गति और दिशा मिली। जेटीआर और जेबीएन का समन्वय - छोटे शहरों में बड़े अवसर : जेटीआर के माध्यम से जहां छोटे शहरों तक पहुंच सुनिश्चित की जा रही है, वहीं जीतो बिजऩेस नेटवर्क के सहयोग से व्यापारिक अवसरों का विस्तार हो रहा है। यह संयोजन छोटे शहरों में बड़े अवसरों की शुरुआत का प्रतीक बन चुका है। जेटीआर + जेबीएन ग्रामीण भारत में जीतो की नई चेतना जेटीआर के प्रमुख उद्देश्य और प्रभाव: लघु व्यवसायों को बढ़ावा देना : स्थानीय उद्यमियों और व्यापारियों को व्यापक नेटवर्क से जोडक़र व्यापारिक अवसर प्रदान करना। कौशल विकास द्वारा सक्षम कार्य बल का निर्माण: युवाओं और प्रोफेशनल्स के लिए स्किल डेवेलपमेंट प्रोग्राम आयोजित करना। ज्ञान-विनिमय को प्रोत्साहन: वे बिनार्स, कार्यशालाओं और मेंटरशिप सत्रों के माध्यम से अनुभव और विशेषज्ञता साझा करना। शिक्षा से नेतृत्व निर्माण: जीतो की शैक्षणिक पहलों में भागीदारी को बढ़ावा देना, जिससे छात्र और नवोदित उद्यमी लाभान्वित हो सकें। सेवा-भावना का विकास: सेवा के मूल्यों को बढ़ावा देते हुए स्थानीय समुदायों को जीतो की सामाजिक पहलों से जोडऩा। जमीन पर दिख रहा असर : मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जेटीआर द्वारा स्थापित ढांच का सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। हाल ही में जिन गांवों में जेटीआर इकाइयाँ बनीं, वहाँ 5 युवाओं का चयन जेएटीएफ के माध्यम से IAS में हुआ। सैकड़ों विद्यार्थियों को छ्वश्व्रक्क JEAP (Education Loan Program) के तहत उच्च शिक्षा हेतु सहायता मिली। इसके अतिरिक्त, जीतो जॉब्स, श्रमण आरोग्यम, मेट्रोमोनी, जेआईआईएफ (इनक्युबेशन एंड इनोवेशन) एवं जीतो स्पोर्ट्स जैसे प्रोजेक्ट्स का लाभ भी अब ग्रामीण जैन समाज तक पहुंच रहा है। जेटीआर का लक्ष्य (दिसंबर 2025 तक): जेटीआर का लक्ष्य दिसंबर 2025 तक 400 से अधिक शहरों में 1000 से अधिक जेटीआर इकाइयाँ स्थापित करने का है, जबकि वर्तमान में हम 184 शहरों में 404 जेटीआर इकाइयों के साथ सक्रिय हैं। भविष्य की योजना: हर गांव तक जेटीआर कमलेश सोजतिया बताते हैं कि जहां भी जैन समाज के 50 या उससे अधिक परिवार हों, वहां जेटीआर की इकाई स्थापित की जाएगी। प्रत्येक इकाई में कम से कम दो युवा और एक महिला सदस्य होंगे, जिससे समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। जीतो अब 7५ चैप्टर्स और ९ जोनों के माध्यम से देशभर में १०00 नए स्थानों पर जेटीआर इकाइयों की स्थापना की योजना बना रहा है। जेटीआर करुणा से समृद्धि की ओर जेटीआर की इस ऐतिहासिक पहल के पीछे विचार है करुणा से समृद्धि। इसका उद्देश्य हर जैन नागरिक को आत्मनिर्भर बनाना, ज्ञान के अवसर उपलब्ध कराना और समुदाय में एकजुटता को बढ़ाना है। जीतो एपेक्स वाइस प्रेसिडेंट कमलेश सोजतिया कहते हैं जेटीआर समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाने का माध्यम है यह केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक परिवर्तन की लहर है। जेटीआर और जेबीएन के इस संगम ने साबित कर दिया है कि जब सोच व्यापक हो और दृष्टि स्पष्ट, तो छोटे शहरों में भी बड़े सपने साकार हो सकते हैं। जीतो का यह प्रयास ग्रामीण भारत में जैन समाज के लिए एक नए युग की शुरुआत है।
- एड़वोकेट हितेश जैन विधि आयोग के सदस्य बने
नई दिल्ली। पुणे के एडवोकेट हितेश जैन को माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत के 23 वें विधि आयोग का पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया है। हितेश जैन शिवगंज - पुणे निवासी एस. के. जैन के पुत्र है। यह नियुक्ति राष्ट्र और जैन समुदाय के लिए गर्व का क्षण है। इस घोषणा से समूर्ण जैन समाज मे हर्ष व्याप्त है। सदस्य के रूप में उनकी भूमिका भारत के कानूनी ढांचे को आकार देने, समकालीन चुनौतियों का समाधान करने और न्यायिक प्रणाली को मजबूत करने के लिए सुधारों की सिफारिश करने में महत्वपूर्ण होगी। शताब्दी गौरव ने हितेश जैन को हार्दिक बधाई देते हुए कहा है कि हमें विश्वास है कि एडवोकेट हितेश जैन इस सम्मानजनक जिम्मेदारी को पूर्ण समर्पण और उत्कृष्टता के साथ निभाएंगे। यह नियुक्ति सरकार की महत्वपूर्ण संस्थानों में सक्षम नेतृत्व को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जिससे विधि आयोग प्रभावशाली कानूनी सिफारिशों की अपनी विरासत को जारी रख सके।
- सादगी, सरलता और विनम्रता की मिसाल है चम्पालाल वर्धन
किसी ने ठीक कहा है कि सादगी जीवन का सबसे बड़ा आभूषण है और सरलता जीवन की वो धारा जो हमे जीवन के सबसे ऊंचे मुकाम पर ले जाती है। लेकिन जिस व्यक्ति के जीवन में सादगी और सरलता के साथ विनम्रता का वास भी हो तब तो फिर उस व्यक्ति को जीवन में वो हर मान, सम्मान, पद, प्रतिष्ठा, अपने आप हासिल हो जाते हैं, जिसके लिए समाज के बड़े बड़े लोग तरसते रहते हैं। भीनमाल निवासी चंपालाल वर्धन ऐसी ही शख्सियत हैं, जिनकी विनम्रता के किस्से लोग बयां करते करते थक जाते हैं। जिनकी सरलता और सादगी की मिसाल और कहीं आसानी से नहीं मिलती। चंपालाल वर्धन अपने इन्हीं तीन गुणों की वजह से पहचाने जाते हैं। वरना, लक्ष्मी तो मुंबई शहर ही नहीं देश भर में और भी हजारों लोगो के पास है, लेकिन वर्धन जितना मान, सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए उनको तरसते देखा जा सकता है। मान, सम्मान और प्रतिष्ठा का यह खजाना उन्हें मिला है उनके पिता किशोरचंद्र वर्धन की व्यावहारिक विरासत से, जिसे चंपालाल वर्धन अपनी मेहनत, परिश्रम और ईमानदार प्रय़ासों से लगातार द्विगुणित करते जा रहे हैं। सही मायऩों में कहा जाए, तो मुंबई ही नहीं देश भर के जैन समाज तो क्या किसी भी अन्य समाज में भी चंपालाल वर्धन जैसा साधारण सा दिखनेवाला गजब प्रतिभाशाली व्यक्तित्व कोई और मिलना न केवल मुश्किल बल्कि अत्यंत असंभव है। जैन समाज के चमकदार गिने जानेवाले लोगों में चंपालाल वर्धन को सबसे जमकदार व्यक्तित्व वाले लोगों में सबसे आगे गिना जा सकता है। क्योंकि अपने शिखर पर गिने जानेवाले कार्यो और बहुत ही सादगी भरी जीवनशैली से वे पूर समाज को रोशन कर रहे है। हर असंभव कार्य को वे सबसे पहले करने में विश्वास रखते हैं। उनका मानना है कि जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है और वो खुद भी ऐसा ही करते हैं। उनकी यही तासीर उनको दूसरों से कुछ अलग मानने को मजबूर करती है। यही कारण है कि समस्या आने से पहले ही चम्पालाल वर्धन के पास उसका समाधान भी आ जाता है। उनकी सफलता का सूत्र वाक्य स्वयं के उपर भरोसा और सही दिशा में कडी मेहनत है। असंभव को संभव करने का नाम ही चम्पालाल वर्धन है। मुंबई के रियल इस्टेट सेक्टर में जब राजस्थानी समाज के लोगों ने शुरूआती दौर पर आना शुरू किया था, उनमें अग्रणी किशोरचंद्र वर्धन के ज्येष्ठ पुत्र चंपालाल वर्धन मुंबई के जाने माने रियल स्टेट डवलपर तो हैं ही, जैन समाज के सबसे प्रसिद्ध समाजसेवी चम्पालाल वर्धन का जन्म 1 अप्रेल 1956 में राजस्थान के जालोर जिले के भीनमाल में हुआ था। उनके पिता किशोरचंद्र वर्धन और माता शांतीबेन वर्धन ने बचपन से ही उन्हें नेक, अच्छा और सच्चा इंसान बनने के संस्कार दिए और वो हमेशा अपने माता-पिता के दिखाए रास्ते पर ही चलते रहें हैं। भाई उम्मेदराज वर्धन और स्वर्गीय भरत वर्धन के साथ भीनमाल में अपनों के बीच बचपन बीता, जिसकी यादें आज भी उन्हें भावविभोर कर देती हैं। कुछ सालों के बाद परिवार भीनमाल से मुंबई आ गया और फिर तब से सभी मुंबई के हो गए और मुंबई को इस प्रकार अपने अंतर्मन में बसा लिया कि मुंबई ही भले ही उनकी पहचान बन गई। लेकिन राजस्थान उनके दिल में बसता है। सेवा को कोई भी कार्य हो, वर्धन परिवार भीनमाल के बारे में सबसे पहले सोचता है। सबके लिए घर का सपना साकार करने की तमन्ना रखनेवाले चम्पालाल के जीवन में उनकी पत्नी उर्मिला वर्धन का आगमन भगवान महावीर का आर्शिवाद बनकर आया। एक आदर्श पत्नी की तरह उर्मिला वर्धन ने जीवन के हर उतार चढाव में सहयोग दिया साथ ही परिवार को पूरी तरह से जोडकर रखा। अपने माता-पिता के दिए संस्कारों को अपने जीवन का आदर्श मानने वाले पुत्र कुणाल, करण और बेटी नीलम और नेहा भी अपने माता-पिता की तरह बहुत ही संवेदनशील और दूसरों की तकलीफों को महसूस करने वाले हैं। दोनो बेटे कुणाल और करण अपने पिता चंपालाल वर्धन के व्यापार में न केवल उनका सहयोग देते हैं बल्कि व्यापार को बढाने में अपना पूरा योगदान दे रहे हैं। श्री वर्धन की बहन श्रीमती अंजु गुलाटी अपने ससुराल में अपना दायित्व निभा रही है। Champalalji Vardhan Family Champalalji Vardhan Profile प्राथमिक शिक्षा राजस्थान के भीनमाल से प्राप्त करने के बाद मुंबई के मारवाडी विद्यालय से माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की और फिर मुंबई के ही लाला लाजपतराय कॉलेज से ग्रेजुएशन और फिर केसी कॉलेज से वकालत की डिग्री प्राप्त की। पढाई समाप्त करने के बाद अपने पिता किशोरचंद्र वर्धन के साथ अपने करियर की शुरूआत की। और साल 1980 में नीलम रियल्टी के नाम से स्वयं का भवन निर्माण का व्यापार शुरू किया जिसे जल्द ही अपनी मेहनत से उन्होंने नई उचाईयां प्रदान की। वे नीलम रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। जिन्होंने वर्ली में एट्रीया मॉल, दादर में स्टार मॉल और साकीनाका में सोलारिस का निर्माण करके भवन निर्माण के क्षेत्र में अपनी बुलंदियों का अहसास कराया। इसके अलावा नीलम नगर मुलुंड पूर्व, वर्धमान नगर मुलुंड पश्चिम, घाटकोपर और नाहुर आदि स्थानों पर अपना शानदार प्रोजेक्ट जैसी अनेकों टाउनशिप प्रोजेक्ट उनकी कंपनी के नाम दर्ज हैं। वर्धन ने अपनी सूझबूझ से व्यापार में सफलता हासिल की, वहीं इन्होंने सामाजिक और धार्मिक कार्यों में भी जमकर हिस्सा लिया और बहुत सारी संस्थाओं जैसे भारत जैन महामंडल, ऑल इंडिय़ा श्वेतांबर जैन कॉन्फरेंस, जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन, सिरोही जालौर प्रवासी संघ और भीनमाल जैन संघ आदि में जिम्मेदार पदों पर रहते हुए उनका मार्गदर्शन भी किया। वर्धन जब भारत जैन महामंडल के प्रेसिडेंट थे तब उन्होंने महावीर जन्म कल्याणक के दिन जैन समुदाय की एक महारैली नरिमन पाइंट से लेकर चैपाटी तक निकाली थी, जो अपने आप में एक इतिहास था। मुंबई में इससे पहले जैन समाज की इतनी बड़ी शक्ति का प्रदर्शन पहले कभी नहीं हुआ। इस महा रैली में 24000 जैनियों ने भाग लेकर इसे जबरदस्त सफल बनाया था। इसके साथ ही पालीताणा, घाटकोपर, मुलुंड, नाहुर और ताडदेव आदि स्थानों पर इन्होंनें मंदिरों के निर्माण करवाये है। सेवा के कार्य करने में चम्पालाल वर्धन यहीं नहीं रूके बल्कि वो महावीर मेमोरियल ट्रस्ट दिल्ली के कार्यकारणी सदस्य होने के साथ आदिनाथ राजेंद्र जैन ट्रस्ट ताडदेव, श्रीमती शांतीबाई के वर्धन घाटकोपर जैन मंदिर ट्रस्टी व एसएमजे तीर्थरक्षा ट्रस्ट आदि के ट्रस्टी भी हैं। चम्पालाल वर्धन ऐसे समाजसेवी हैं जिनके कार्यों को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता है, क्योंकि कई लाचार और जरूरतमंदों की मदद तो वो बिना किसी को बताए ही कर देते हैं। सभी लोग सुखी और प्रसन्न हों, हमेशा उनका यही प्रयास रहता है। इसलिए जब भी प्राकृतिक आपदा या फिर देश में कहीं कोई समस्या आती है तो वो सदैव मदद हेतु तत्पर रहते हैं। महाराष्ट्र और अन्य स्थानों पर आई भयंकर बाढ हो या राजस्थान का अकाल, वर्धन हर बार तकलीफ में फंसे लोगों की मदद करने में अग्रणी रहे हैं। चम्पालाल वर्धन जैन समाज के कुछ ऐसे लोगों में शामिल हैं जिनके सभी राजनीतिक पार्टियों में बड़े बड़े नेताओं से बेहतर संबंध है। एक तरफ शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से घरेलू संबंध हैं तो दूसरी तरफ भाजपा के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश माथुर से भी इनके पारिवारिक रिश्ते हैं। वर्धन परिवार ने शंखेश्वर तीर्थ, मोहनखेडा और पालीताणा में धर्मशाला का निर्माण कराया साथ ही मुंबई में उपाश्रय और वेलफेयर सेंटर का निर्माण करवाया है। चम्पालाल वर्धन आल इंडिया जैन श्वेतांबर कांफ्रेंस के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ अखिल भारतीय सौधर्मवृत्त तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन संघ के संघ राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जैन समाज की अन्र्तराष्ट्रीय संस्था जैन इन्टरनेशनल ट्रेड आर्गेनाईजेशन (जीतो) के प्रेसिडेंट भी रह चुके हैं एवं वर्तमान में जीतो के एडवाईजर हैं। भारत जैन महामंडल द्वारा समाज रत्न की उपाधि प्रदान की गई है। श्री आदिनाथ जैन श्वेतांबर पेढी, मोहनखेडा द्वारा मोहन खेडा गौरव और जैन पत्रकार संघ द्वारा समाज रत्न और साल 2012 में आट्रीया मॉल के निर्माण के लिए बेस्ट मॉल अवार्ड से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। वर्धन मानते हैं कि समाज में गतिशील रहने के लिए सकारात्मक सोच के समाचार पत्रों की सक्त जरूरत है, क्योंकि संपर्क, संबंध और समाज तीनों आपस में बहुत गहरे जुड़े हुए हैं और इनको जोड़े रहने में समाचार पत्रों की बहुत बड़ी भूमिका है। वर्धन कहते हैं कि शताब्दी गौरव यह भूमिका राजस्थानी समाज के बीच बहुत महत्वपूर्ण तरीके से निभा रहा है। समाज के हर सकारात्मक कार्य में सफल बनाने में समाचार पत्र भी बड़ा सहयोग करते हैं। वे कहते हैं कि शताब्दी गौरव पूरे जैन समाज का गौरव है, क्योंकि समाज के प्रत्येक कार्य में शताब्दी गौरव बहुत ही सलीके से सकारात्मक भूमिका निभानेवाले समाचार पत्रों में गिना जाता है। उनका मानना हैं कि अपने लिए तो सभी जीते हैं लेकिन सच्चा इंसान वही होता है, जो दूसरों के लिए जीता है। जो निस्वार्थ भाव से हमेशा समाज और देश की भलाई के लिए अपने पूरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय लगा दे, उसी का मान, सम्मान, पद और प्रतिष्ठा हासिल होते हैं। चम्पालाल वर्धन ने यह सब शुरू से ही किया है, इसीलिए समाज के सर्वोच्च शिखर पर अगली पंक्ति में बिराजमान लोगों के बीच उनको भी स्थान हासिल है।
- जसवंत मुणोत बने फेडरेशन ऑफ जेसीसीआई के प्रेसिडेंट
चेन्नई। व्यापार, वाणिज्य और उद्योग के विकास को प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने के लिए जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (जीतो एपेक्स) ने हाल ही में कंपनी अधिनियम की धारा 8 के तहत एक सहायक कंपनी जीतो चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फेडरेशन ऑफ जेसीसीआई) की स्थापना की थी। 9 नवंबर 2024 को आयोजित जीतो एपेक्स बोर्ड की बैठक में चेन्नई के उद्योगपति जसवंत मुणोत को 2024- 2026, की अवधि के लिए जेसीसीआई के फेडरेशन के निदेशक मंडल का प्रेसिडेंट नियुक्त किया गया है। इससे पहले 2022-2024 में मुणोत ने जीतो एपेक्स में कार्य समिति में जॉइंट ट्रेजरार एवं संविधान संशोधन समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने जेसीसीआई के फेडरेशन की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे 2014-2016 में जीतो चेन्नई चैप्टर के चेयरमेन एवं जीतो एपेक्स में वाइस प्रेसिडेंट एवं चीफ सेक्रेट्री के रूप में भी अपनी सेवायें दे चुके है। जसवंत मुणोत चेन्नई स्थित मुणोत ग्रुप ऑफ कंपनीज के वाइस चेयरमेन हैं
- सेलो ग्रुप के सीएमडी प्रदीप राठोड ने 25 करोड़ रुपए के निवेश का एमओयू किया
सादड़ी में सेलो फाउंडेशन 13 करोड़ से बनाएगा कॉलेज जिले के गल्र्स स्कूलों के विकास में भी 12 करोड़ रुपए खर्च करेंगे शताब्दी गौरव। पाली। जिले को शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सुविधा मिलने वाली है। जयपुर में हुई राइजिंग राजस्थान एजुकेशन प्री समिट में सेलो ग्रुप के सीएमडी प्रदीप राठोड द्वारा 25 करोड़ के एमओयू पर साइन हुए। श्री राठोड सादड़ी में कॉलेज के लिए 13 करोड़ व जिले के गल्र्स स्कूलों के विकास के लिए 12 करोड़ रुपए खर्च करेंगे। शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षा के क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश व सहयोग के लिए भामाशाहों को आकर्षित करने राइजिंग राजस्थान प्री समिट जयपुर में हुई। इसमें 507 एमओयू हुए। सीएम भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में सेलो ग्रुप के सीएमडी प्रदीप राठोड के प्रतिनिधि के रूप में भाजपा नेता नरेश ओझा ने एमओयू पर साइन किए। डिप्टी सीएम प्रेमचंद्र बैरवा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर सहित अधिकारीगण मौजूद थे। गोविंद व्यास ने जानकारी देते हुए बताया कि सादड़ी में 13 करोड़ से कॉलेज का निर्माण सेलो ग्रुप कराएगा। इसमें कॉलेज भवन से लेकर खेल मैदान, लाइब्रेरी, हॉल से लेकर सभी आधुनिक सुविधाएं होगी। कॉलेज पूरी तरह से हाईटेक होगी। इसमें वाई फाई से लेकर सभी सुविधाएं होगी। ऑनलाइन कक्षाओं से लेकर सभी विषयों के एक्सपर्ट की सेवाएं ले सकेंगे। पूरा कॉलेज परिसर 20 बीघा में बनाएगा। इससे आसपास के गांवों के बच्चों को सादड़ी में बेहतर उच्च शिक्षा मिल सकेगी। इसके अलावा दूसरा 12 करोड़ का एमओयू किया है। उसमें जिले की सभी गल्र्स स्कूल में बेसिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। क्लास रूम से लेकर इंटरनेट, फर्नीचर से लेकर टायलेट तक की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सेलो ग्रुप ने जिला समिट में 500 करोड़ के निवेश का एमओयू किया जिला समिट पिछले दिनों फालना में हुई थी। इसमें सेलो ग्रुप 500 करोड़ का निवेश करेगा। इसमें सांडेराव के पास औद्योगिक पार्क 250 करोड़ से बनाया जाएगा। इसे लेकर प्रभारी मंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्री सहित प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में एमओयू हो गया है। पाली जिले में पहली बार इस प्रकार का बड़ा प्रोजेक्ट में आ रहा है।
- युवा प्रतिभा, सकारात्म सोच और सफलता की मिसाल
अनिल जैन जिन्होंने अपने बूते पर बनाया अपना आसमान और मिली सही समय पर सही निर्णय लेनेवाले युवा उद्यमी की पहचान प्रतिभा किसी प्रोत्साहन की मोहताज नहीं होती। वह तो फूल की तरह खिलती है। खुशबू की तरह महकती है। हवा की तरह बहती है। और खूबसूरती की तरह हर किसी को अपना दीवाना बना देती है। प्रतिभा दरअसल एक खजाना होती है, जो निखरती है अपने आप। उसे किसी की सहायता, किसी के सहयोग और किसी के भी पीछे चलने की जरूरत नहीं होती। प्रतिभा तो बरसात के उस बादल की तरह है, जो बरसती है, जो धरती को पूरी तरह से भिगो देती है। सांचौर चेन्नई निवासी युवा उद्यमी अनिल जैन की प्रतिभा भी कुछ कुछ ऐसी ही है, जिसने निखरना शुरू किया, तो न तो अनिल जैन को रुकने दिया, न थमने दिया और न ही पीछे मुडक़र देखने दिया। आज अनिल जैन जिंदगी के जिस मुकाम पर हैं, वहां पहुंचने में केवल और केवल उनकी प्रतिभा का कमाल है। उनके जितनी उम्र में लोग सफलता के सपने देखते हैं। लेकिन यह अनिल जैन की किस्मत का कमाल है कि आज हजारों लोग उनकी तरह से सफल होने के सपने पाल रहे हैं। हर मामले में बिजली से भी ज्यादा तेजी से सोचनेवाले और अंतिम लक्ष्य को साधने का निर्णय लेनेवाले अनिल जैन का जन्म चेन्नई में एक व्यवसायी परिवार में हुआ। मूल रूप से सांचोर (राजस्थान) निवासी ताराचंद जैन एवं उगमदेवी जैन के पुत्र अनिल जैन का विवाह सन 1999 मे डिंपल जैन के साथ हुआ। व्यवसायिक सफलता के सूत्र अनिल जैन अपने बेटे यश जैन को उसी तरह संस्कार में दे रहे है, जैसे उन्हें अपने माता-पिता से विरासत में मिले। एक छोटा भाई और 2 बहने हैं। भाई की शादी हो चुकी है और एक बेटा है। दोनों बहनें राजरतन और रत्नमणि का विवाह अहमदाबाद में हुआ है। पिताजी अपने बड़े भाई के साथ यहां पर आये थे। मैने व्यापार में जब कदम रखा तो मेरे पिताजी और बड़े पिताजी साथ मे व्यापार कर रहे थे, मैंने उनसे व्यापार की बारीकियां सीखी। वो हमेशा मुझे सही रास्ता दिखाते थे। सन 2007 में उन्हें 'द टाइम्स ऑफ इंडियाÓ की ओर से सम्मान मिला और 2008 में वे केलटेक रेफ्रिजरेशन, सिंगापोर द्वारा विश्व के 100 उद्योगपतियों के साथ सम्मानित किये गए। सन 2009 में अनिल जैन को 'टाइम्स यंग एन्टरप्रेन्योर अवॉर्डÓ मिला और सन 2018 में उन्हें राजस्थान युवा रत्न सम्मान से विभूषित किया गया। वे औद्योगित विकास की संस्था एसोचैम की एपेक्स बॉड़ी में सन 201६ से 20२० तक कमेटी मेंबर रहे और सीआईआई, में भी वे सक्रिय हैं। देश में रेफ्रिजरेशन से संबद्ध कई संस्थाओं में भी वे अग्रणी पदों पर काम कर रहे हैं, साथ ही राजस्थान सोलार असोसिएशन के संस्थापक सदस्य व इंडो जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स के भी सदस्य हैं। अभिनव और नए विचार देनेवाली पुस्तकें पढऩे के शोकीन अनिल जैन दुनिया भर में जैन समाज की सबसे बड़ी संस्था जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) के 2016 से 2018 तक सेक्रेटरी रहे और जीतो एपेक्स में वे 2020 तक के लिए जनरल सेक्रेटरी हैं। इसके साथ ही जीतो की सहयोगी संस्थाओं जैन एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रेनिंग फाउंडेशन एवं श्रमण आरोग्यम में भी वे संरक्षक सदस्य हैं। जिन जगहों के बारे में लोग कम जानते हैं, वहां घूमने के शौकीन अनिल जैन देश भर के 120 गांवों में स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति करनेवाले संगठन उगता फाउंडेशन के संस्थापक हैं। युवा पीढ़ी के अपने साथियों के लिए उनका कहना है कि नई पीढ़ी बहुत अलग तरीके से सोचने लगी है। लेकिन जो भी काम करें, वह जीवन मूल्यों के साथ करेंगे, तो ही सफल हो सकते हैं। नई पीढ़ी को परंपरागत धारणा से हटकर कुछ करना होगा। हमारे पिता या दादाजी जो काम जिस तरीके से पहले से करते रहे हैं, हम भी वही काम उसी तरीके से कर लें, यह धारणा छोडक़र कुछ नया करनेवाले ही तेजी से आगे बढ़ते हैं। वे 42 साल के हैं, युवा हैं और उर्जावान हैं। और सबसे बड़ी बात यह है कि वे अपनी उम्र के युवा साथियों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। 13 सितंबर 1976 को जन्मे अनिल जैन हमेशा से ही खुद को एक तेजजर्रार उद्यमी के रूप में देखने के लिए आतुर थे। और उसी आतुरता ने उन्हें आज बहुत ही कम समय में इस मुकाम पर पहुंचाया। परिवार के बारे में जाने, तो पिता और चाचा 60 के दशक के अंत में चेन्नई आ गए थे और ऑटोमोबाइल फाइनेंस बिजनेस के साथ शुरुआत की और वर्षों से धीरे-धीरे स्टेनलेस स्टील उद्योग से जुडक़र बहुत आगे चले गए। उन्होंने मद्रास मेटल एंड रेफ्रीजेशन के नाम से 1976 में एक कंपनी की शुरुआत की और सन 1980 में बॉम्बे मेटल्स के नाम से दूसरी बड़ी शुरूआत करके अपने व्यापार को काफी विस्तार दिया। लेकिन अनिल जैन ने देखा कि 90 के दशक के आखिर में उनके पिता और चाचा व्यावसायिक तौर पर अलग हो रहे हैं, तो उन्होंने मन बना लिया कि पिताजी को पूरी तरह से व्यापार में सहायता की जाए। दो में से एक कंपनी बॉम्बे मेटल उस बंटवारे में अनिल जैन के पिताजी के हिस्से में आई और वे अपने स्कूल के दिनों से ही पिता के व्यवसाय में सक्रिय रुचि लेने लगे। अनिल जैन हर सप्ताहांत यानी शनिवार को व्यापार से संबद्ध यात्रा पर निकल जाते थे और देखते थे कि उनके पिता का व्यापार कैसे संचालित होता है। उन्होंने चेन्नई के डीएवी हायर सेकेंडरी स्कूल, से अपनी स्कूली पढ़ाई की और लोयोला कॉलेज से बीकॉम किया। अनिल जैन ने अपने शुरूआती काल में ही जीवन में एक बात बहुत गहरे दिमाग में स्थापित कर ली थी कि अपने सभी कार्यों के लिए हम स्वयं ही उत्तरदायी होते हैं। सो, अनिल जैन जीवन के सारे काम पूरी जिम्मेदारी से करते रहे। उन्होंने धीरे-धीरे व्यापार सीखना शुरू कर दिया और सन 2000 के दशक के अंत तक अपने पिता की मदद करना शुरू कर दिया। यह वह समय था, जब उन्हें अपने पिता के पारंपरिक व्यापार की बहुत सारी जानकारियां सीखनी थी। लेकिन जिंदगी तो जिंदगी है, सफलता के लिए वह हर व्यक्ति से कुछ अलग और कुछ खास किस्म की अपेक्षा रखती है। सो, अनिल जैन ने भी देखा कि जिंदगी तो उनसे कुछ विशिष्ट अपेक्षाएं पाल रही हैं, तो वे पिता के व्यवसाय में उनका साथ देते देते शुरूआती समय में ही व्यापार के हर विषय में निर्णय लेने के मामले में स्वतंत्र हो गए। और जिंदगी में कुछ करने और कुछ बनने की कोशिश में उन्होंने शेयर बाजार में कारोबार किया और कॉलेज में पढ़ाई के दौरान जीन्स और टी-शर्ट का धंधा भी किया। वह अपने जीवन स्तर को उंचा उठाने के लिए अपना पैसा कमाना चाहते थे। इस बारे में कुछ करने और आगे बढऩे की आकांक्षा में उन्होंने अपने पिताजी का पारंपरिक पारिवारिक व्यवसाय छोड़ दिया और अपने बूते पर अपना आसमान रचने के लिए कुछ नया काम शुरू करने के लिए निकल पड़े। सन, 2002 में अनिल जैन ने रेफिक्स रेफ्रिजरेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से रेफ्रिजरेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित किया, और कंपनी को लेकर शेयर बाजार में उतरे जो उस जमाने में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर सूचीबद्ध हुई। तमिलनाड़ु के कांचीपुरम जिले के थिरुपुरुर स्थित महाबलीपुरम रोड पर उत्पादन इकाई की स्थापना की, जो बहुत जल्द ही मार्केट लीडर बन गई थी। सन 2005-06 तक अनिल जैन की रेफिक्स कंपनी ने 44त्न बाजार पर कब्जा कर लिया और एक तरह से रेफ्रिजरेंट गैस के क्षेत्र में बाजार पर आधिपत्य जमा लिया। अनिल जैन की जिंदगी में यह वो वक्त था, जब उनके आसपास के लोग ही उनको सबसे व्यस्त व्यक्ति के रूप में जानने लगे थे। इसके बाद अनिल जैन ने पीछे मुडक़र नहीं देखा। वे लगातार सफल होते रहे। अनिल जैन मानते हैं कि हम जो भी काम करते हैं, उसके बारे में पूर्ण रूप से व्यावहारिक और तथ्यात्मक बनें। और एक बार जब हम अपने में कुछ करने के गुण देख लेते हैं, तो उसे आगे बढ़ाना चाहिए। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह काम क्या है। अपनी इसी सोच के कारण ही अनिल जैन ने, अपने पिता के परंपरागत व्यापार से अलग अपनी दुनिया का निर्माण किया। सन 2008 में उन्होंने एक सौर उर्जा से संबद्ध कंपनी रेफेक्स एनर्जी शुरू की, इस कंपनी का उद्धेश्य भारत को उर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है हाल ही में रेफेक्स ने सन एडिसनस (ए ग्लोबल सोलर कंपनी) सोलर वाटर पम्प्स एंड रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन बिजऩेस को लेने के पीछे इसे बढ़ावा देना बड़े कारोबार के रूप में विकसित करना है। अनिल जैन मानते हैं कि विद्युतीकृत गांव का मतलब ये नही है कि हर घर मे बिजली पहुच चुकी है। अभी भी भारत के 40 लाख घरों में बिजली नही पहुची है। और इन घरों में बिजली जल्द से जल्द पहुंचाने के लिये अनिल जैन बहुत सारी राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। साथ ही इनकी कंपनी ने एक प्लांट भी बनाया है, जिसमे सोलर वाटर पंप को ग्रिड से जोडक़र किसानों के लिए तैयार किया है जिसमे एक मीटर भी रहेगा और किसान इसके माध्यम से अतिरिक्त कमाई भी कर सकेंगे। ये पूरा काम बिना किसी ग्रांट या सब्सिडी के हो रहा है। ये एक ऐसा राष्ट्रीय प्रोजेक्ट है जिससे लाखों किसानों को फायदा होगा। इस प्रोजेक्ट के द्वारा कंपनियों से 30 प्रतिशत बिजली की बचत होगी जोकि किसानों के काम आएगी। तकनीक में गहन रुचि के कारण अनिल जैन ने 2015 में एजे वेंचर्स और निवेश शुरू करने का मौका हाथ से जाने नहीं दिया। यह कंपनी भारत में स्टार्ट्स अप को पूंजीगत सहायता उपलब्ध कराती है। अनिल मानते हैं कि जिंदगी कोई सौ मीटर की रेस नहीं है, वह तो बहुत लंबी होती है। जितना लंबा चलोगे, चुनौतियां उतनी ही बड़ी होती जाएंगी। लेकिन चुनौतियां से किसी को डरने की कोई जरूरत नहीं है। दरअसल चुनौतियां हमें नए रास्ते दिखाती है। इन्हीं चुनोतियों से जूझकर अनिल जैन ने अपनी जिंदगी को इस खास मुकाम पर पहुंचाया है। अपनी सफलता की कहानी बताते हुए अनिल जैन जिंदगी के इस मुकाम का सारा श्रेय अपनी टीम को देते हैं। देखा जाए, तो वास्तव में अनिल जैन की सबसे बड़ी ताकत उनकी टीम ही है। उन्होंने हमेशा उन्हें प्रोत्साहित करने की कोशिश की है। उनका कहना है कि कामं करनेवाले को स्वतंत्र रूप से उस कंफर्ट जोन में तनाव महसूस किए बिना काम करने दो। ताकि वे नए विचारों के साथ आगे आएं और बिना किसी दबाव के वे सही निर्णय ले सकें। अपनी कंपनी में अनिल जैन ने सभी के लिए स्वतंत्र रूप से विकसित होने का माहौल बनाया, और कंपनी के प्रति अपनी वफादारी को मजबूत किया। और वे हर काम में हर तरह से हमेसा अपने साथियों के साथ खड़े रहते हैं। देश और दुनिया में युवा पीढ़ी के लिए मिसाल के रूप में देखे जानेवाले अनिल जैन हमेशा से सकारात्मक सोच के धनी रहे। वे मानते हैं कि सकारात्मक सोच ही सफलता के रास्ते आसान कपती है। वे बहुत तेजी से फैसले लेते है। अनिल जैन मानते हैं कि युवा पीढ़ी में बहुत उर्जा है और इस पीढ़ी को समय की कीमत समझते हुए सही समय पर सही फैसले लेकर इसका सदुपयोग करना चाहिए। क्योंकि समय यदि हाथ से निकल गया, तो फिर हम कुछ नहीं कर सकते। शताब्दी गौरव के बारे में उनका कहना है कि इस तरह से समाचार पत्र समाज के लिए स्तंभ का काम करते हैं। समाज का पूरा ताना बाना सकारात्मक सोचवाले लोगों पर ही टिका है और शताब्दी गौरव समाज के अच्छे काम करनेवालों को प्रोत्साहन देता रहा है।
- श्री आत्म वल्लभ जैन सेवा मंडल सादडी (राणकपूर) की मेनेजिंग कमिटी २०२४-२७
मुंबई। श्री आत्म वल्लभ जैन सेवा मंडल सादड़ी (राणकपुर) के त्रैवार्षिक चुनाव (2024-27) गत दिनों राजस्थान हॉल, गोरेगांव में सम्पन्न हुए जिसमे सर्व सम्म्मति से वसंत जावंतराजजी रांका के अध्यक्ष चुना गया। अध्यक्ष मनोनित होने पर वसंत रांका ने 1 सप्ताह में विचार विमर्श कर कार्यकारणी बनाने की घोषणा की थी। श्री रांका ने अपनी कार्यकारणी की घोषणा की जिसमे उपाध्यक्ष विकास पुखराजजी रतनपारिया चौहान, सचिव श्रेणिक मोहनलालजी जैन, उप सचिव जयंत अमृतलालजी तलेसरा, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र मिलापचंदजी रांका, उप कोषाध्यक्ष अरुण मुलचंदजी संघवी साथ ही कमिटी मेंबर अंकित विमलचंदजी छाजेड, दिलीप सोहनराजजी सुंदेशा, जयराज चंदनमलजी राठौड, किशोर जयचंदजी बाफना, विजय रतिलालजी रांका, विजयराज रुपचंदजी रांका, विक्रम किरणराजजी राठौड, विरेन्द्र शांतिलालजी जोधावत, विवेक शिवराजजी रांका, भरत ओटरमलजी गुगलिया (ठाणे), प्रवीण कपूरचंदजी राठौड़ (ठाणे), राकेश कालीदासजी रांका (मुंबई), रणजीत लालचंदजी बाफना (बदलापुर), श्रीपाल बाबुलालजी बाफना (आईपीपी), वसंत भगवानदासजी जैन (सूरत) समाविष्ट है।
- आरडीबी फाउंडेशन द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजनगर्मियो में रक्तयूनिट की कमी को दूर करने का प्रयास
शताब्दी गौरव कोलकाता। जून का महीना चिलचिलाती गर्मी की अभूतपूर्व लहर लेकर आया, जो कोलकाता में कुछ ज्यादा ही थी। इसने न केवल हमें शारीरिक रूप से प्रभावित किया बल्कि हमारी रक्त आपूर्ति पर भी असर डाला। रक्तदान शिविरों की संख्या में उल्लेखनीय रूप से कमी आई, जिससे हमारे ब्लड बैंकों में इस जीवन रक्षक संसाधन की कमी हो गई। इस संकट से उबरने के लिए आरडीबी फाउंडेशन ने ब्लड बैंकों को फिर से भरने की पहल की। आरडीबी फाउंडेशन ने 23 जून 2024 को रीजेंट वाटिका पी-353, कीयाताला रोड, गोलपार्क, हिंदुस्तान पार्क, कीयाताला, कोलकाता, पश्चिम बंगाल 700029 पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया। यह अभियान हमारे हेल्थ पार्टनर्स, बेले व्यू क्लिनिक ब्लड सेंटर और वेन्यू पार्टनर, रीजेंट वाटिका बैंक्वेट द्वारा प्रदान किए गए अमूल्य समर्थन और देखभाल के साथ आयोजित किया गया था। हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि शिविर में 80 दानदाता एकत्र हुए, जिनमें 20 पहली बार दान करने वाले भी शामिल थे। बेले व्यू क्लिनिक ब्लड सेंटर के 11 डॉक्टर, नर्स और स्टाफ सदस्य और 10 आरडीबी फाउंडेशन स्वयंसेवक थे जिन्होंने इस शिविर को सफल बनाने में मदद की। आरडीबी समूह के अध्यक्ष सुंदरलाल दुगड़ इस गरिमामय सभा में उपस्थित थे। इस पहल का नेतृत्व आरडीबी फाउंडेशन के सदस्य यशस्वी दुगर ने किया। एक रक्तदान से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है, इस बात को ध्यान में रखते हुए आरडीबी फाउंडेशन टीम ने इस अभियान को शानदार सफलता बनाने के लिए दाताओं, आयोजकों, स्वयंसेवकों, ब्लड बैंकों और समर्थकों के अटूट समर्पण के साथ मिलकर काम किया।














