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जीतो टाउन रिप्रेजेंटेटिव (JTR) को मिला स्वतंत्र वर्टीकल का दर्जाछोटे शहरों से वैश्विक मंच तक जीतो की अनूठी पहल

  • Writer: vibhachandawat1977
    vibhachandawat1977
  • May 21
  • 3 min read

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जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) की मैनेजमेंट कमेटी ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जीतो टाउन रिप्रेजेंटेटिव (JTR ) को एक स्वतंत्र वर्टीकल के रूप में मान्यता प्रदान की है। यह निर्णय न केवल जीतो की समावेशी सोच को दर्शाता है, बल्कि टायर 2 और टायर 3 शहरों, कस्बों एवं गांवों में बसे जैन समाज को जीतो की मुख्य धारा से जोडऩे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल के संस्थापक जीतो एपेक्स वाइस प्रेसिडेंट कमलेश सोजतिया हैं, जिनके नेतृत्व में जेटीआर एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। उनके साथ शरद पानोत और अशोक मेहता ने भी सक्रिय और प्रेरणादायी भूमिका निभाई है, जिससे इस अभियान को गति और दिशा मिली।

जेटीआर और जेबीएन का समन्वय - छोटे शहरों में बड़े अवसर :

जेटीआर के माध्यम से जहां छोटे शहरों तक पहुंच सुनिश्चित की जा रही है, वहीं जीतो बिजऩेस नेटवर्क  के सहयोग से व्यापारिक अवसरों का विस्तार हो रहा है। यह संयोजन छोटे शहरों में बड़े अवसरों की शुरुआत का प्रतीक बन चुका है।

जेटीआर + जेबीएन ग्रामीण भारत में जीतो की नई चेतना

जेटीआर के प्रमुख उद्देश्य और प्रभाव: लघु व्यवसायों को बढ़ावा देना : स्थानीय उद्यमियों और व्यापारियों को व्यापक नेटवर्क से जोडक़र व्यापारिक अवसर प्रदान करना। कौशल विकास द्वारा सक्षम कार्य बल का निर्माण: युवाओं और प्रोफेशनल्स के लिए स्किल डेवेलपमेंट प्रोग्राम आयोजित करना। ज्ञान-विनिमय को प्रोत्साहन: वे बिनार्स, कार्यशालाओं और मेंटरशिप सत्रों के माध्यम से अनुभव और विशेषज्ञता साझा करना। शिक्षा से नेतृत्व निर्माण: जीतो की शैक्षणिक पहलों में भागीदारी को बढ़ावा देना, जिससे छात्र और नवोदित उद्यमी लाभान्वित हो सकें। सेवा-भावना का विकास: सेवा के मूल्यों को बढ़ावा देते हुए स्थानीय समुदायों को जीतो की सामाजिक पहलों से जोडऩा।

जमीन पर दिख रहा असर : मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जेटीआर द्वारा स्थापित ढांच का सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। हाल ही में जिन गांवों में जेटीआर इकाइयाँ बनीं, वहाँ 5 युवाओं का चयन जेएटीएफ के माध्यम से IAS में हुआ। सैकड़ों विद्यार्थियों को छ्वश्व्रक्क JEAP (Education Loan Program) के तहत उच्च शिक्षा हेतु सहायता मिली। इसके अतिरिक्त, जीतो जॉब्स, श्रमण आरोग्यम, मेट्रोमोनी, जेआईआईएफ (इनक्युबेशन एंड इनोवेशन) एवं जीतो स्पोर्ट्स जैसे प्रोजेक्ट्स का लाभ भी अब ग्रामीण जैन समाज तक पहुंच रहा है।

जेटीआर का लक्ष्य (दिसंबर 2025 तक): जेटीआर का लक्ष्य दिसंबर 2025 तक 400 से अधिक शहरों में 1000 से अधिक जेटीआर इकाइयाँ स्थापित करने का है, जबकि वर्तमान में हम 184 शहरों में 404 जेटीआर इकाइयों के साथ सक्रिय हैं।

भविष्य की योजना: हर गांव तक जेटीआर

कमलेश सोजतिया बताते हैं कि जहां भी जैन समाज के 50 या उससे अधिक परिवार हों, वहां जेटीआर की इकाई स्थापित की जाएगी। प्रत्येक इकाई में कम से कम दो युवा और एक महिला सदस्य होंगे, जिससे समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

जीतो अब 7५ चैप्टर्स और ९ जोनों के माध्यम से देशभर में १०00 नए स्थानों पर जेटीआर इकाइयों की स्थापना की योजना बना रहा है। जेटीआर करुणा से समृद्धि की ओर जेटीआर की इस ऐतिहासिक पहल के पीछे विचार है करुणा से समृद्धि। इसका उद्देश्य हर जैन नागरिक को आत्मनिर्भर बनाना, ज्ञान के अवसर उपलब्ध कराना और समुदाय में एकजुटता को बढ़ाना है।

जीतो एपेक्स वाइस प्रेसिडेंट कमलेश सोजतिया कहते हैं जेटीआर समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाने का माध्यम है यह केवल एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक परिवर्तन की लहर है। जेटीआर और जेबीएन के इस संगम ने साबित कर दिया है कि जब सोच व्यापक हो और दृष्टि स्पष्ट, तो छोटे शहरों में भी बड़े सपने साकार हो सकते हैं। जीतो का यह प्रयास ग्रामीण भारत में जैन समाज के लिए एक नए युग की शुरुआत है।


 
 
 

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