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जीतो कम समय में बन गया जैन समाज की सबसे बड़ी पहचान

  • Writer: vibhachandawat1977
    vibhachandawat1977
  • Sep 28
  • 3 min read

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मुंबई। जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन जीतो दुनिया भर में जैन समाज की सबसे बड़ी पहचान बन गया है। इस संगठन ने दुनिया भर के विभिन्न देशों सहित भारत में न केवल बड़े शहरों में बल्कि कस्बों और छोटे शहरों तक भी अपनी पहुंच स्थापित की है, जिससे जैन समाज के व्यापारियों और उद्यमियों को एक मंच प्रदान किया जा सके तथा समाज की सेवा की जा सके।

जीतो के पूर्व चेयरमेन गजेंद्रकुमार पाटनी, नरेंद्रकुमार बलडोटा, तेजराज गुलेचा, मोतीलाल ओसवाल, प्रदीप राठौड़, गणपतराज चौधरी, सुखराज नाहर ने संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। प्रेसिडेंट हेमन्त शाह, चंपालाल वर्धन, मोतीलाल ओसवाल, उत्कर्ष शाह/राकेश मेहता, शांतिलाल कवाड़, गणपतराज चौधरी, सुरेश मुथा, अभयकुमार श्रीश्रीमाल/कांतिलाल ओसवाल आदि ने संगठन की गतिविधियों को मजबूत किया तो वर्तमान चेयरमेन पृथ्वीराज कोठारी एवं प्रेसिडेंट विजय भंडारी भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। जीतो की वैश्विक उपस्थिति इसके सदस्यों की सक्रियता और संगठन की गतिविधियों की व्यापकता से स्पष्ट होती है। जीतो अपनी सहयोगी संस्थाओं,  जेएटीएफ, श्रमण आरोग्यम, जेबीएन, जीप, जीतो स्पोर्ट्स, मेट्रोमोनियल, जेटीआर, जीतो जॉब्स, जीतो प्रोफेशनल फोरम, जे पॉइंट,  जेआईआईएफ, जीतो इंटरनेशनल, जीतो यूथ विंग, जीतो लेडीज विंग के कार्यों के माध्यमं से केवल 18 साल में ही जीतो दुनिया के बेहतरीन संगठनों में गिना जाने लगा है। विश्व के विभिन्न देशों में 'जीतोÓ के ७५ चैप्टर्स ९ जोन, ३२ इंटरनेशनल चैप्टर में १९ हजार सदस्य सक्रिय हैं, जो स्थानीय स्तर पर जैन समुदाय की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। इसी कारण, जीतो जैन समाज की सबसे बड़ी पहचान बन गया है, तथा जैन समाज की एक प्रमुख वैश्विक संस्था के रूप में स्थापित हो गया है, जो व्यापार, शिक्षा, संस्कृति, और समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका में अग्रणी है।


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यह संगठन जैन धर्म से जुड़े उद्यमियों, उद्योगपतियों, बुद्धिजीवियों, चिंतकों, और समाजसेवियों को एक मंच प्रदान करता है, जिससे वे सामूहिक रूप से सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान दे सकें। जीतो की स्थापना के बाद से इसने जैन समाज को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है, और यह संगठन आज जैन समुदाय की सबसे बड़ी और प्रभावशाली संस्था के रूप में उभरा है। 'जीतोÓ का प्राथमिक उद्देश्य जैन समुदाय के बीच व्यापारिक और उद्यमशीलता की भावना को बढ़ावा देना है। संगठन नियमित रूप से व्यापारिक सम्मेलन, नेटवर्किंग इवेंट्स, और कार्यशालाओं का आयोजन करता है, जहां उद्यमी अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं और नए अवसरों की खोज करते हैं। जीतो ने स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसायों को प्रोत्साहित करने के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम और वित्तीय सहायता योजनाएं भी शुरू की हैं। इन प्रयासों ने न केवल जैन उद्यमियों को सशक्त बनाया है, बल्कि वैश्विक व्यापार मंच पर जैन समुदाय की उपस्थिति को भी मजबूत किया है।

शिक्षा के क्षेत्र में जीतो ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। संगठन ने प्रशासनिक सेवाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं, जो युवाओं को सिविल सेवा परीक्षाओं के लिए तैयार करते हैं। इसके अतिरिक्त, जीतो  स्कॉलरशिप और शैक्षिक सहायता प्रदान करता है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर जैन छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिले। जीतो के शैक्षिक कार्यक्रम न केवल व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा देते हैं, बल्कि समाज में नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार करने में भी सहायक हैं। जीतो सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल है। संगठन स्वास्थ्य शिविर, रक्तदान शिविर और आपदा राहत कार्यों का आयोजन करता है। इसके अलावा, जीतो  जैन धर्म के साधु-संतों की सेवा और जैन संस्कृति के संरक्षण के लिए भी समर्पित है। संगठन द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम जैन परंपराओं और मूल्यों को बढ़ावा देते हैं, जिससे युवा पीढ़ी अपनी विरासत से जुड़ सके। जीतो की ये गतिविधियां सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता को मजबूत करती हैं।

जीतो ने व्यापार, शिक्षा, संस्कृति और समाजसेवा के क्षेत्र में अपने कार्यों से जैन समाज को एक नई दिशा प्रदान की है। इसकी गतिविधियों ने न केवल जैन समुदाय को सशक्त बनाया है, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर एक प्रभावशाली पहचान भी दिलाई है। जीतो की यह यात्रा सामूहिक प्रयासों और समर्पण का प्रतीक है, जो भविष्य में और अधिक प्रगति की ओर अग्रसर है। जीतो की स्थापना का मुख्य उद्देश्य जैन समाज के व्यापारिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देना है, साथ ही साथ जैन समाज के लोगों को एक मंच प्रदान करना है जहां वे अपने व्यापारिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा कर सकें और समाधान निकाल सकें। जीतो की सफलता का एक प्रमुख कारण इसकी व्यापक पहुंच है, जो न केवल बड़े शहरों में बल्कि छोटे छोटे कस्बों और शहरों तक भी फैली हुई है। इससे जैन समाज के व्यापारियों और उद्यमियों को एक मंच प्रदान किया जा सका है जहां वे अपने व्यापारिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा कर सकें और समाधान निकाल सकें।

 
 
 

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