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मातृभक्ति का अद्भुत इतिहास रचा प्रवीण कोठारी ने लक्ष्मीदेवी कोठारी के स्वर्णसीढ़ी महोत्सव में मातृभक्ति का अद्धभुत दृश्य

  • Yogi Bhandari
  • Mar 6
  • 2 min read

रानी स्टेशन। ममता से भीगे सुरों और संवेदनाओं से सजे शब्दों की अनुपम जुगलबंदी ने रानी स्टेशन में लक्ष्मीदेवी आसुलालजी कोठारी के स्वर्णसीढ़ी आरोहण कार्यक्रम में जब स्वर्णसीढ़ी महोत्सव का श्रीगणेश किया, तो पूरा वातावरण श्रद्धा और प्रेरणा से भर उठा। मुंबई से पधारे लोकप्रिय गायक नरेन्द्र वाणीगोता की मर्मस्पर्शी गायकी ने माँ की करुणा, त्याग और वात्सल्य का सार सुरों में उतार दिया, वहीं मंचसारथी भूषण ललित परमार के हृदयस्पर्शी संचालन ने स्वर्णसीढ़ी की भावधारा को जीवन-दर्शन से जोड़ते हुए श्रोताओं के मन में गहरे संस्कार रोप दिए। इसी सशक्त आरंभ के साथ नेहा नित्या आर्ट्स द्वारा प्रविण कोठारी की अनुशंसा पर प्रस्तुत यह संपूर्ण आयोजन प्रेरणास्पद ऊँचाइयों को छूता चला गया। रानी स्टेशन स्थित बासा भवन में आयोजित स्वर्णसीढ़ी महोत्सव ने परंपरा, श्रद्धा और पीढिय़ों के संस्कारों का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। हर्षोल्लास के बीच चतुर्थ पीढ़ी की कड़ी के रूप में परपौत्री दिवा धैर्य कोठारी द्वारा परदादी श्रीमती लक्ष्मीदेवी आसुलालजी कोठारी को स्वर्णसीढ़ी पर आरूढ़ कराए जाने का भावपूर्ण क्षण उपस्थित जनसमूह के लिए अविस्मरणीय बन गया। यह दृश्य केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन-पूर्णता और संस्कार-संरक्षा का प्रतीक बना। रानी की पुण्यभूमि पर आयोजित इस आयोजन की संकल्पना में मातृभक्ति की उजली छाया स्पष्ट दिखाई दी। कार्यक्रम के सूत्रधार रहे प्रवीण आंसुलालजी कोठारी (लक्ष्मी लीला ग्रुप), जिन्होंने अपनी माता के चरणों में समर्पण अर्पित करते हुए स्वर्णसीढ़ी की भावना को समाज के सामने जीवंत किया। माँ की स्वर्णसीढ़ी के उपलक्ष में पुत्र प्रवीण कोठारी ने जीवदया हेतु 2,22,222/- रुपये दान, तथा बासा भवन, रानी में माँ के नाम की तख्ती हेतु 3,33,333/- रुपये की घोषणा कर अपनी दरियादिली का सशक्त परिचय दिया। स्वजनों, मित्रों, शुभचिंतकों तथा ग्रामवासियों की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान किया।


मातोश्री लक्ष्मीदेवी की पालकी के साथ नृत्यांगनाओं की भव्य प्रस्तुति से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। तत्पश्चात विधि-विधान सहित संगीतमय स्वर्णसीढ़ी अनुष्ठान संपन्न हुआ। 

कोठारी परिवार की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और रानी महिला मंडल की लघु नाटिका ने भावों की गहराई को मंच पर उतारा। समारोह में सोने-चांदी के पाँच लकी ड्रा आकर्षण का केंद्र रहे। अक्षत-वधामणा, पदचिह्न (पगलिया) और दुग्ध-पद-पक्षालन के पावन क्षणों में भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा, अनेक दर्शकों की आँखें नम हो उठीं। कार्यक्रम के दौरान शून्य से शिखर तक की यात्रा को दर्शाती, प्रविण कोठारी के जीवन पर आधारित एक प्रेरक डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। अंत में आयोजकों द्वारा कलाकारों का तिलक, माला और शाल से बहुमान किया गया। समग्र रूप से यह आयोजन स्वर्णसीढ़ी के उस व्यापक अर्थ को रेखांकित करता रहा, जो आयु की गणना से आगे बढक़र अनुभव, तप, करुणा और संस्कारों की निरंतरता का उत्सव है, जहाँ चौथी पीढ़ी का सान्निध्य जीवन की पूर्णता का प्रतीक बनकर उभरता है।





 
 
 

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