Read in English →

हितेश दोशी : छोटे गांव से निकलकर भारत के सौर ऊर्जा उद्योग में बनाई वैश्विक पहचान

5,000 से 78,000 करोड़ तक का सफर, हौसले और दूरदृष्टि से खड़ी की सोलर ऊर्जा की विशाल कंपनी

हितेश दोशी
हितेश दोशी

किसी इंसान की शुरुआत कितनी छोटी है, यह मायने नहीं रखता, बल्कि उसके सपने कितने बड़े हैं और उन्हें पूरा करने का जुनून कितना मजबूत है, यही उसकी सफलता तय करता है। इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं हितेश दोशी, जिन्होंने महज 5,000 उधार लेकर कारोबार शुरू किया और अपनी मेहनत, दूरदृष्टि तथा जोखिम उठाने की क्षमता के दम पर हजारों करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा कर दिया। हितेश दोशी का बचपन एक छोटे से गांव में बीता। गांव में सातवीं कक्षा के बाद आगे की पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं थी। लेकिन शिक्षा हासिल करने का उनका जुनून इतना मजबूत था कि वे रोजाना साइकिल से कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव पढ़ने जाते थे। कॉलेज के दिनों में उन्होंने अपनी पढ़ाई और रहने का खर्च निकालने के लिए छोटे-मोटे व्यापार शुरू किए। इन कामों से होने वाली कमाई से उन्होंने अपनी फीस और अन्य खर्च पूरे किए।

साल 1985 में उन्होंने एक रिश्तेदार से 5,000 उधार लेकर इंस्ट्रूमेंट गेज के व्यापार की शुरुआत की। सीमित पूंजी के बावजूद उनके इरादे बड़े थे। वर्ष 1989 में उन्होंने बैंक से 1.5 लाख का कर्ज लिया और कुछ लेथ मशीनें खरीदकर छोटी-सी टीम के साथ अपनी कंपनी ‘वारी इंस्ट्रूमेंट्स’ (Waaree Instruments) की स्थापना की। कंपनी ने प्रेशर गेज, थर्मामीटर और औद्योगिक उपकरणों के निर्माण से धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2007 तक कंपनी अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में निर्यात करने लगी थी।

इसी वर्ष जर्मनी में आयोजित सौर ऊर्जा प्रदर्शनी की यात्रा ने उनके जीवन और कारोबार की दिशा बदल दी। वहां उन्होंने सौर ऊर्जा के भविष्य को करीब से समझा और भारत में ही सोलर पैनल बनाने का संकल्प लिया। इसी सोच के साथ उन्होंने वर्ष 2007 में सूरत में 30 मेगावाट क्षमता का सोलर मॉड्यूल प्लांट स्थापित किया। उस समय भारत में सौर ऊर्जा का बाजार शुरुआती दौर में था, इसलिए कंपनी को अपना अधिकांश कारोबार यूरोप के बाजारों में करना पड़ा। दूसरी ओर, चीन के सस्ते उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करना बेहद कठिन था। कई बार कंपनी के सामने अस्तित्व का संकट भी खड़ा हुआ, लेकिन हितेश दोशी ने हार नहीं मानी।

उन्होंने अपने पुराने इंस्ट्रूमेंट व्यवसाय को एक स्विस कंपनी को बेचकर अपना पूरा ध्यान सौर ऊर्जा कारोबार पर केंद्रित कर दिया। इसके बाद लगातार नए कारखाने स्थापित किए, उत्पादन क्षमता बढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की। अक्टूबर 2024 में उनकी कंपनी वारी एनर्जीज (Waaree Energies) शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई। कंपनी के आईपीओ को ऐतिहासिक प्रतिक्रिया मिली और लिस्टिंग के दिन शेयर में लगभग 56 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। आज वारी एनर्जीज भारत की प्रमुख सोलर पैनल निर्माता कंपनियों में शामिल है और इसका बाजार मूल्य लगभग 78,000 करोड़ बताया जाता है।

हितेश दोशी की कहानी हमें सिखाती है कि सफलता के लिए बड़े शहर, बड़ा परिवार या बड़ी पूंजी होना जरूरी नहीं है। जरूरी है बड़ा सपना, लगातार मेहनत, सही समय पर सही फैसला लेने की क्षमता और विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का साहस। 5,000 के उधार से शुरू हुआ यह सफर इस बात का प्रमाण है कि छोटी शुरुआत भी बड़े इतिहास की नींव बन सकती है।

Hitesh Doshi: from a small village to a global identity in India’s solar energy industry

Hitesh Doshi, who started a business with just Rs 5,000 borrowed, took Waaree Energies to the ranks of India’s leading solar panel makers. His journey is an inspiration.

Read the full article in English →