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दीर्घ प्रतिक्षा की पूर्णाहुती पश्चात बांद्रा में श्री संभवनाथ जिनालय का जिर्णोदारश्री संभवनाथ जिनालय जीर्णोद्धार का कार्य पूर्णता की ओर

मुंबई। श्री सावत्थी नगरी बांद्रा (प.) मुंबई की धरा पर स्थित जिनालय में तीर्थाधिपति स्वरूप विराजित श्री संभवनाथ भगवान की स्वर्णजयंती वर्षगाठ पूर्ण होने के पश्चात जिनालय के जिर्णोद्वार का कार्य श्री राजस्थान जैन श्वे. मू.पू. संघ एवं श्री चन्द्रप्रभूजी जैन देरासर ट्रस्ट बांद्रा (प.) के निर्णयानुसार अपनी तिव्र गती से पूर्णता हेतु आगे बढ़ रहा है। जिर्णोद्वार कार्य के अवलोकन तथा निरिक्षण हेतु पधारे हुये सुविशाल गच्छाधिपति आचार्य श्री विजय रामचंद्र सूरीश्वरजी महाराज के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य श्री पुण्यपाल सूरीश्वरजी महाराज आदि आचार्य भगवंतो का मार्गदर्शन एवं बांद्रा (प.) में चातुर्मास हेतू विराजित आचार्य श्री प्रदिपचंद्र सूरीश्वरजी महाराज, तपस्वी सम्राट, शांत मूर्ति. प.पू.आ. श्री हंसरत्न सूरीश्वरजी महाराज एवं. श्री आत्म वल्लभ इंददिन्न समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य श्री नित्यानंद सूरीश्वरजी महाराज तथा अन्य पूज्य गुरु भगवंती के अवलोकन निरीक्षण एवं मार्गदर्शन में पूर्णता की और अग्रसर है। मंदिर का काम अनुभवी शिल्पकार (सोमपुरा) हसमुखदीवाकर की देख रेख में एक विशाल, सर्व सुविधा युक्त. जैन श्वेतांबर शिल्प शास्त्र के नियमों के अनुसार मकराना के श्वेत संग-मर-मरीय पत्थरों से उन्हें राजस्थान तथा उडिसा के कुशल शिल्पकारी द्वारा कलात्मक रूप से तराशकर एक अनुठा, भव्य, मनमोहक, अद्वितीय नाकाशी से युक्त जिनालय का निर्माण होने जा रहा है। जहाँ सैकडो वर्ष प्राचीन विश्व प्रसिध्द देलवाडा एवं राणकपुर तथा कुमारियाजी जिन मंदिरों की नकाशीदार कोरणी की अप्रतीम झलकियाँ इस जिनालय की भव्यता में चार चांद लगाने जा रही है। देड़ भोमिया युक्त कलात्मक थंबो, दादरी, सामरण, पाट नकाशीदार छत फर्श पर सुंदर गालिचा से परिपूर्ण विशाल रंग मंडप के, आँठ कलात्मक गोखलों में 41" के मैसलाणा के पत्थरों से निर्मित श्री आदिनाथ दादा, श्री नेमिनाथ प्रभु तथा 21" के गणधर प्रभु श्री गौतम स्वामी, श्री पुंडरिक स्वामी दादा की परिकर सहित प्रतीमाये, विराजित होगी।


मूलगंभारे की परिक्रमा हेतू एक सुंदर एवं दर्शनीय भव्य गलियारा जिसमें संभवनाथ दादा के पाँच कल्याणक तथा श्री शैत्रुजंय तथा गिरनार के विशाल पट तथा काँच की फर्श परिकमा को दर्शनीय बनादेगी।उपर नुतन शिखर तथा दोनो और दो भव्य सामरण ध्वजा, कलश, दंड युक्त होंगे। रंग मंडप की छते, कुशल कारिगरी का अनुपम दृश्य प्रदर्शित करेगी। बाहर श्रृगांर चौकी में चार देवों के गोखलों में परिकर तथा ध्वजा कलश सहित, श्री. नाकोडा मेरूजी, श्री. माणिभद्रदेव, श्री घंटाकर्ण महावीर तथा श्री. इष्टदेव उसी प्रकार चार देवीओं के गोखले में श्री अंबिका देवी श्री पदमावती देवी, श्री चक्रेश्वारी देवी तथा श्री सरस्वती देवी परिकर सहित विराजमान होगी। जिनालय के अग्रिम भाग में दोनो तरफ पत्थर के तराशे हुये 2 विशाल हाथी, महावत, तथा छत्री में विराजीत राजा रानी तथा मुख्य प्रवेश श्रृंगार चौकी में अद्वितीय छत, परियों द्वारा स्वागत की मुद्रा अनुपम नकाशीदारतोरण होगा उस पर सामरण तथा बाहर एक तरफ जिनालय पेढी तथा दुसरी तरफ तिलक पुष्प खंड जिनके छत के उपर 2 गुंबज जिनालय की विशालता को दशविगें। जिन मंदिर के मूल गंभारे में पक्षाल का पावन जल एक कुये मे समाहित होगा। अस्वस्थ तथा दिव्यांग व्यक्ति भी देवाधिदेव के दर्शन से वंचित ना रहे इसलिए रेम्प से विलचेअर की व्यवस्था, एक केशर ब्रास तथा अष्ट प्रकारी पूजा हेतु अलग कक्ष, तथा एक सुंदर रजत रथ वाटिका के आयोजन की परिकल्पना है। 64 इन्द्र, 4 देविया, 16 विद्यादेवी, 2 कुबेर, 2 यक्ष-यक्षणी, 2 यम, 2 वरूण, 4 पहरेदार, 4 द्वारपाल, 8 परिया, विविध प्रकार के वाजिन्त्री सहित, आदि के रूपकाम से संपन्न यह विशाल भव्य मंदिर, संपूर्ण मुंबई के समस्त जैन धर्मावलंबीओं की आस्था का अद्भूत केन्द्र बनेगा।


इन सारी विशेषताओं से युक्त एक देव विमान तुल्य तथा सुंदर अप्रतिम मुकुट में कोहिनूर रत्न समान यह नवनिर्मित भव्य जिनालय जैन तथा जैने तर लोगो के लिए पूजा, दर्शन, वंदन के लिए अतिशय आकर्षण का केन्द्र होगा ऐसी परिकल्पना श्री संघ बान्दरा (प.) करता है।

संघ ने इस विशिष्ठ कार्य में लाभ लेने इच्छुक तथा संलग्न हमारे ट्रस्ट मंडळ एवं जिर्णोद्वार समिती के सभी साथी, तथा श्री संघ के अनेक धर्मानुरागी शासन समर्पित युवा बंधुओं का विशेष आभार तथा उन्हें शत् शत् नमन एवं जिर्णोद्धार कार्य के पूर्ण होने तक होने वाली समस्त असुविधाओं के लिये हृदयपूर्वक क्षमायाचना मांगा हैं। संघ के अध्यक्ष शांतिलाल वालचंदजी रांका, (सादडी) बान्दरा (प.) श्री. चंद्रप्रभूजी जैन देरासर ट्रस्ट, बांद्रा (प.) है।



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